कविता · Reading time: 1 minute

शहीद की पाती

मा भारती की पुकार है ये हे वीर सपूतों वार करो।।
मातृभूमि की रक्षा हेतु न किसी आदेश का इंतज़ार करो बस वार करो वार करो।
ना जाने पाये व्यर्थ वलिदान उन लालों का ,प्रतिकार करो। बस वार करो वार करो।
श्री राम के वंशज हो तुम उठाओ धनुष और संहार करो।
बस वार करो वार करो।
बहुत बन चुके शांति दूत अब तो काल दूत बन प्रहार करो।
बस वार करो वार करो।
सदियों से छलनी होते आये इस आर्यावर्त की यही पुकार अब तो इसका उद्धार करो।
बस वार करो वार करो।
हो सत्ता में कोई भी इस बात का न विचार करो।
बस वार करो वार करो।।
(अनिरुद्ध)

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