“शहीद का दर्द”

आज फिर हुई भारत की मिट्टी लहू लुहान है
खो दिए भारत ने आज फिर से कई जवान है
कौन जवाब देगा जो सनाटा है गांव की गलियों का
शोर सुनाई देता है सिर्फ उन बंदूको की नलियो का
गर्व है शहादत पे लेकिन अंदर से पिता वह टूट गया
इस बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा जाने क्यों छूट गया
इंतज़ार करते करते उस माँ की आँखे हुई है फिर नम
कैसे बताऊँ कैसे छुपाऊँ जो है अब ज़िन्दगी भर का गम
टूट गयी है जो कल तक खनकती थी चूड़िया
कैसे मिट पाएंगी जो हुई है अब इतनी दूरियाँ
किसको अब छोटी बेटी पापा कह के बुलायेगी
देखेगी जब भी फोटो तोह याद बहुत ही आएगी
कौन जवाब देगा जो सनाटा है गांव की गलियों का
शोर सुनाई देता है सिर्फ उन बंदूको की नलियो का
फिर अब से टीवी पर बहुत इस हिंसा की निंदा होगी
लेकिन न जाने कहाँ से मानवता फिर से जिन्दा होगी
गोली किसी को भी लगे मरती हमेशा मानवता ही है
हिंसा तोह हमेशा से संसार में बढ़ाती दानवता ही है
न जाने क्यों हिंसा में लगा हुआ आज का इंसान है
फिर लेकिन बातचीत ही हर समस्या का समाधान है
– विवेक कपूर

Like Comment 0
Views 60

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share