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शहादत पर

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

कविता

December 2, 2016

एक पल के लिए बनाने वाला भी रोया होगा,
किसी का अरमान जब यूँ मौत की नींद सोया होगा।
हाँथों की मेहँदी छूटी भी नहीं कि चूड़ियाँ तोड़नी पड़ी,
कौन है जो ये लम्हा देखकर न रोया होगा।

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Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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