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शशि शीत में

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 12, 2017

आसमान मे भरी चांदनी
हंसता है आकाश रातभर
दौड लगाता शशि शीत रात मे
कर्म कर रहा जाग जागकर
सजग सुनहरा आसमान है
पर सन्नाटा है निशीथ मे।
सुबह के आने तक दौडा है
मुस्काता है अपनी जीत मे
औषधि के हे जीवन दाता
उपमा देते रहे गीत मे।
धन्य हो रहा नभ धरा भी
मुदित रहा चकोर प्रीत मे
शीतलता के गुण महान है
सफलता का मूल प्रान है।
सिर पर शिव धारण करते है
चन्द्रशेषर शिव भगवान है।

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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