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शशिभूषण समद

#JNU के छात्र आंदोलन का एक सिपाही: कॉमरेड ‘#शशिभूषण समद’ जो दृष्टि हीन हैं।
पुलिस और सरकार जानवर हुई है इन्हें भी पीटा गया
छाती में गहरा चोट है। ऐसा बताया जा रहा है, अब ऐम्स में भर्ती हैं।
जिन्हें भी इन छात्रों को पिटते देख मजा आ रहा, वो चिंता बिकुल न करें उनके बच्चों का भी नंबर आने ही वाला है । तब देखेंगे कौन मीर जाफ़र की तरह खुश होता है या फिर
राज बल्लभ, अमीचंद या मीर कासिम की तरह।
ये अंग्रेजों के ही असली औलादें हैं जो तुम्हें तुम्हारे अपनों से ही धोखा, फरेब, बेईमानी करवाएंगे । तुम्हें बेहतर भविष्य का लालच देकर और ‘ ब्लैक होल ‘ जैसा स्वांग रचेंगे ओर जैसे ही पहला कांटा निकला दूसरा नंबर तुम्हारा ही होगा । फिर तुम्हारे ही किसी अपने को तुम्हारे खिलाफ कर के तुम्हारा पत्ता साफ कराएंगे। तब ऐसे ही खुश होना दांत फाड़ना, और तुम्हारे बच्चे भीख मांगेंगे क्यूं की उनके पास वही नहीं होगा जिस से अपने जिंदगी को बेहतर कर सकें । कहने का मतलब उचित शिक्षा जो हमारे तुम्हारे औकात में ही नहीं होगा कि अपने बच्चों को दे सकें।
बस घंटा डोलना और घंटा किसी को फ़र्क नहीं पड़ेगा कि तुम और तुम्हारी ओलादें भीख मांग रही हैं या चोरी डकैती कर रहीं हैं।
इसी बात पर मुझे इतिहासकार ‘माल सेन’ का लिखा हुआ कुछ याद आ रहा है जो कहीं कभी पढ़ा था याद नहीं कहां उन्होंने लिखा था
“इसमें कोई संदेह नहीं इस बूढ़े मीर जाफर को 3 साल पहले की वो दिन याद जरूर आई होगी, जब पलासी के मैदान में ‘ सिराजुद्दौला ‘ अपनी पगड़ी इस बूढ़े के पैरों में रख कर अपने देश और आवाम को बचाने के लिए उस से ‘ मिर जाफर से ‘ भीख मांग रहा था और ये बूढ़ा खुद को और अपने ईमान को अंग्रेजों के हाथों बेच चुका था। और आज उसका दामद ‘ मीर कासिम ‘ उसके साथ वही कर रहा है जो उस ने किया था कभी और अंग्रेजी सेना उसके दामाद के सेना के साथ मिल कर उसे उस महल से गिरफ्तार करने और नजरबंद करने के लिए खड़ी है जिस महल को उस ने धोखे और फरेब से उस नौजवान से छीना जो अपने देश और आवाम से प्यार करता था। जिसमे तीन साल रह कर इस ने वो सब झेला जो अपने जीवन के 58 सालों में भी नहीं झेला होगा, आखिर क्या मिला इस बूढ़े को इतना फरेब ओर छल प्रपंच कर के ”
हो सकता है मै शब्दशः नहीं लिख पाई होऊंगी लेकिन उस का सनच्छेप में अर्थ शायद यही था ।
तो जिन लोगों को भी jnu के छात्रों के हालत पर हंसी आती होगी वो सब लोग अपनी थोड़ी हंसी अपने लिए भी बचा कर रखें ।विश्वास न हो तो अपने हाथों से एक बार #पलासी के युद्ध के पन्ने जरूर पलटें वॉट्सएप ज्ञान कहां भगा जा रहा वो तो वहीं रहेगा।
कभी कभी असली इतिहास के पन्ने भी पलट लें मज़ा आयेगा…#जय हो
#सिद्धार्थ

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मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो क्यूँ न कुछ अलग किया जाय... लड़ने के लिए तलवार नही कलम को हथियार किया जाय थूक से इतिहास नही लिखा…
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