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शरीर

गली के चौराहे पर
फटे पुराने पोशाक में
खड़ी है अपने साथ
शरीर को लेकर,
न कोई दिशा न मंजिल
फिरभी खड़ी है वह
शरीर के ईंधन के लिए।

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Bikash Baruah
Bikash Baruah
Guwahati, Assam
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मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा...
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