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“शरीर ही तो झुलसा है”

इंदु वर्मा

इंदु वर्मा

कविता

January 7, 2017

शरीर ही तो झुलसा है…
रूह में जान अब भी बाकी है..
हिम्मत से लड़ूंगी ज़िन्दगी की लड़ाई
आत्मसम्मान मेरा अब भी बाकी है…

मिटाई है लाली होठों की मेरी
पर होठों की मुस्कान अब भी बाकी है
काली हूँ मैं,मैं दुर्गा भी हूँ
हौसलों में उड़ान अब भी बाकी है…

बदसूरत बनाया मुझको तो तूने
बदसीरत है तू ये बात भी साँची है
जलेगा सवालों से पल पल तू मेरे
हर सवाल में तेज़ाब अब भी बाकी है

“इंदु रिंकी वर्मा”©

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Author
इंदु वर्मा
मैं "इंदु वर्मा" राजस्थान की निवासी हूं,कोई बहुत बड़ी लेखिका या कवयित्री नहीं हूं लेकिन हाँ लिखना अच्छा लगता है सामाजिक विषयों और परिस्थितियों पर मन और कलम का गठबंधन करके ☺ कोई किताब या पत्रिका भी नहीं छपी पर... Read more
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