Jul 8, 2020 · कविता
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शरीफों का मुहल्ला

ये शरीफों का मुहल्ला है,
सिसकियां तेज हो तो
कानों में रूई भर लो
दखल न दो,
वो पति-पत्नी का मामला है
ये शरीफों का मुहल्ला है,
गलियां भट रही हैं, कचड़ो से
तो भरने दो,
ये मुझ अकेले की बात नहीं,
ये तो मुहल्ला का मामला है
ये शरीफों का मुहल्ला है,
पार्कों की तब्दीली तो देखो
मंदिरों से भर रहे हैं,
अब मेरे बच्चे खेलेंगें कहाँ ?
अरे! कुछ न कहो ये धार्मिक मामला है
ये शरीफों का मुहल्ला है

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Smriti Singh
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मैं इंजीनियरिंग की छात्रा हूं| मुझे कविता, कहानी लिखना -पढ़ना दोनों पसंद है | मै... View full profile
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