.
Skip to content

शराब मत पीना

डॉ सुलक्षणा अहलावत

डॉ सुलक्षणा अहलावत

गज़ल/गीतिका

September 22, 2016

कोय दारु ना पियो भाइयों या स घणी खोटी।
छुड़वा दे स या दारु भाइयों मानस की रोटी।।

शुरू शुरू म्ह शौकियां पीवैं फेर होज्यां आदि।
इस दारु के कारण बड़े बड़ां की होगी बर्बादी।
एक दारु कारण रोज टूटैं सँ शगाई ब्याह शादी।
दारू के ऐब तै बढ़ कै ना स कोय बीमारी मोटी।।

देखै दारू के कारण सत्तर बिमारी लाग ज्यां।
टोटा आज्या घर म्ह, सारी ख़ुशी दूर भाग ज्यां।
पी कै दारू करैं लड़ाई पड़ोसी ताहीं जाग ज्यां।
बालकां नै वो रोज पीटै अर बहु की पाड़ै चोटी।।

अड़ोसी पड़ोसी भाईचारे आलै रोज समझावैं।
यारे प्यारे रिश्तेदार पां पकड़ कै उसणै मनावैं।
पर उसकै एक ना लागै सारी सर पर कै जावैं।
नशे की हालत म्ह वो करण लाग ज्या कार छोटी।।

आखर म्ह तंग आ कै घर आली फाँसी खाज्या।
घर उजड़ै पाछै उसकै सारी समझ म्ह आज्या।
घर बाहर कै सारे काम करै हांडे भाज्या भाज्या।
सीखण खातर कविताई सुलक्षणा नै डाँट ओटी।।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

Author
डॉ सुलक्षणा अहलावत
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ... Read more
Recommended Posts
नारी
ईंट पत्थर गारा तै बणै मकान नै घर बनावै स वा, फेर बखेर कै प्रेम की खुशबु घर नै महकावै स वा। जन्म लेवे किते,... Read more
दर्द किसान का (हरियाणवी)
कोय ना समझदा दुःख एक किसान का। होरया स जोखम उसनै आपणी जान का।। जेठ साढ़ के घाम म्ह जलै वो ठरै पौ के जाड्डे... Read more
मृत्यु के बाद
मौत होते ऐ आदमी की आड़े सब किमै ऐ बदल जावै स, जिसकै काँधे प थी जिम्मेदारी वो हे बोझ नजर आवै स। चारपाई प... Read more
कर्मचारी और सरकार
किसी सरकार बणी या म्हारै हरियाणे म्ह, कर्मचारियाँ नै रोकना चाहवै स थाणे म्ह। तानाशाही रवैया अपणाण लाग री स या, दुश्मन बणाण लाग री... Read more