कविता · Reading time: 1 minute

शराब को आदाब

जिधर देखो शराब शराब शराब
शराब खरीदने और बेचने वालो दोनो को मेरा आदाब

40 दिन की मेहनत मिट्टी में मिल ग ई
क्या शराब बेचे बिना सरकार की नींव हिल ग ई
कर दिया सारे देश का माहौल खराब

शराब खरीदने और बेचने वालो दोनो को मेरा आदाब

क्या आदमी क्या औरत सब लाईन में लगें है
लगता नहीं डाॅक्टर और पुलिस करमी सारे ग ए ठगे है
सारी सामाजिक दूरी और सावधानी हो गई बरबाद

शराब खरीदने और बेचने वालो दोनो को मेरा आदाब

70%महंगी होने पर भी इन्हे चाहिए शराब का घूंट
अगर ये दवाई होती तो ये ही मांगते 70% तक की छूट
बताईए क्या शराब से होगें या अनाज से घर आबाद

शराब खरीदने और बेचने वालो दोनो को मेरा आदाब

क्या अभी तक तुम्हे ये हुआ नहीं है ज्ञान
कि तुम को खुद ही रखना है अपना ध्यान
पल पल बढ़ रही है करोना मरीजो की तादाद

शराब खरीदने और बेचने वालो दोनो को मेरा आदाब

जिधर देखो शराब शराब शराब

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