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शब्द

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

कविता

September 7, 2017

शब्द जीवन्त होते हैं
और कालजयी भी
पर यह क्या हो गया है
शब्दों की संस्कृति
मर रही है
शब्द अब
घबड़ाने लगे है
प्रयोग की मार्मिक वेदना
उन्हें
विवश कर रहा है,
पलायन के लिए-
शब्दों की असामयिक मौत
होने लगी है
शब्द
सदमे में हैं
और
प्रतीक्षा कर रहे हैं
नए
जीवन की
नव प्रयोग की।

Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी... Read more
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