कविता · Reading time: 1 minute

शब्द

छंद मुक्त रचना
विषय-शब्द

शब्द असीम भाव हैं,
नहीं हैं माना हाथ इनके और नहीं पांव हैं।
कभी घायल की मरहम बनते,
तो किसी को देते घाव हैं।
माना इनकी जुबान नहीं हैं,
पर फिर भी ये बोलते हैं।
कभी प्रीत का इज़हार करते,
कभी गहरे रहस्य खोलते हैं।
किसने आप को भरमा दिया साहब
कि शब्द नहीं बोलते हैं।

शब्द आकर्षण हैं,अभिराम हैं, विकर्षण हैं।
शब्द विरह में साथी हैं,पी को लिखी पाती हैं।
शब्द प्रेमोत्थान हैं, प्रेमी की मीठी पीड़ा में सोपान हैं।
शब्द विस्तृत ज्ञान हैं, शब्द मुस्कान और सम्मान है।
शब्द गुरु हैं, प्रेरक हैं,नव सृजन हेतु प्रवाहमान हैं।
शब्द करुणा हैं वियोग हैं, असाध्य कल्याण कारी
योग है।

शब्द साज़ हैं, शब्द नग़मा है,शब्द सात सुरों की ताल हैं।
शब्द स्मृतियों की ज्योति जलाते और तम में नव निर्माण हैं।शब्द तहज़ीब हैं,आगाज़ हैं,परवाज़ और अज़ल सौगात हैं। शब्द चिंतन हैं,बोधन हैं, शब्द रिश्तों के संबोधन हैं। शब्द सत्य और असत्य हैं।सुशब्दों को अपना ‘नीलम’ ये शब्द जीवन​ का कृत्य हैं।

नीलम शर्मा

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