कविता · Reading time: 1 minute

शब्द सीढ़ी

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❆ शब्द सीढ़ी –
❆ तिथि – 05 दिसंबर 2018
❆ वार – बुधवार
❆ शब्द – कृष्ण, राधा, रुक्मणी, मीरा, सुदामा

▼ विषय अनुसार रचना

हर कोई कहते सुनते , तीन लोक से मथुरा न्यारी है।
उसके एक मात्र अधिनायक , बनवारी मुरलीधर गिरधारी है।

गोकुल में बैठ ड़ार कदम्ब पर ,सबके चीर हरे, और हरे हिया।
सबको आकर्षित करनें वाले #कृष्ण की वृषभानु लली है प्राणप्रिया।

कोई भी रिश्ता नहीं देखो फिर भी हृदयगुहा विराजे है श्री #राधा।
सत्य वचन सब यही उच्चारें इनके बिना काँन्ह कुँवर है आधा।

रणछोड़दास बन भागे तब द्वारिकापुरी में पाई इन्होंने शरण।
लाज राख पटरानी बनाई स्वयं #रुक्मणी ने अरज कर किया वरण।

पति कुटुम्ब कुलमर्यादा त्याग जोगन बनी #मीरा गिरधरनागर की।
राज पाट महल नौमहले छोड़ पी गई विष प्याला ‘पी’ नटनागर की।

सुधबुध भूल भई बावरी वन उपवन गाये लेकर एकतारा।
ज्योति में ज्योति समा गई हाथ न आया कुछ, ‘राणा’बेचारा।

बाल सखा संदीपनी आश्रम का नाम बताया गरीब #सुदामा।
सुनते कान नाम मित्र का छोड़ भगे जामा पगरखी तथा सारी वामा।

पूर्णावतार सच्चिदानन्दघन की अपूर्व सब लीला हैं अपरम्पार।
वेदपुराण उपनिषदशास्त्र ऋषिमहर्षि असमर्थ कैसे ‘अजय’ पायें पार।

#स्वरचित_मौलिक_सर्वाधिकार_सुरक्षित*
✍ अजय कुमार पारीक’अकिंचन’
☛ जयपुर (राजस्थान)

.Ajaikumar Pareek.

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अजय कुमार पारीक'अकिंचन जयपुर (राजस्थान) दोहा, मुक्तक, कविता, ग़ज़ल आदि लेखन का शौक है, लगभग नियमित फेसबुक पर अपनी वॉल तथा विभिन्न साहित्यिक समूहों में रचनाएँ पोस्ट करता हूँ जिन्हें…
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