कविता · Reading time: 1 minute

शब्द शक्ति

भाषा की शक्ति जब दी है
ईश्वर ने हमको भरपूर ।
उसका हम सद्उपयोग करें ।
कर दे सारे शिकवे दूर।
क्यो कटु बोले क्यो निंदा रस घोले
मीठा बोले हो मसहूर।
शब्द शक्ति सबसे ताकतवर
कर देती सब कठिनाई दूर।
मन के भाव मूर्त करती है
समझ मे आये जो हो दूर।
केवल भाषा अलग बनाती
मानव सब जीवो का नूर।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

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