Jan 23, 2017 · कविता
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शब्द उधार तो दे दो

“शब्द उधार तो दे दो”
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मन करता है कुछ लिखुं..!!!
क्या लिखुं……….?
कोई शब्द विद मुझे, शब्द उधार तो दे दो ।
खुशी लिखुं या गम लिखुं,
ज्यादा लिखुं या कम लिखुं,
कोई शब्द लता के मुझे, पर्ण चार तो दे दो ।
इर्ष्या लिखुं या प्यार लिखुं,
वृष्टि लिखुं या बहार लिखुं,
कोई सज्जन मुझे, पूरा साहित्य सार तो दे दो ।
कल्पना लिखुं या विज्ञान लिखुं,
विधि लिखुं या विधान लिखुं,
कोई सुन्दर सुनहरे मुझे, अलंकार तो दे दो ।
कथा लिखुं या कहानी लिखुं,
मीरा लिखुं या दिवानी लिखुं,
कोई उतम सा मुझे. अपना सुविचार तो दे दो ।
कोई शब्द विद मुझे. शब्द उधार तो दे दो ।

© राजदीप सिँह इन्दा

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Rajdeep Singh Inda
Rajdeep Singh Inda
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