लघु कथा · Reading time: 2 minutes

” शब्दों से सफाई “

श्वेतांक का पूरा घर कामवाली बाइयों के भरोसे ही चलता पत्नी किसी कंपनी में बड़े ओहदे पर आसीन और पैसों के दंभ में चूर…घर के काम से कोई लेना देना नही अगर भूले भटके कभी कुछ करना भी पड़ गया तो पूरे घर को प्रचंड रूप देखना पड़ता , सारे घर की ज़िम्मेदारी श्वेतांक की ही थी क्योंकि उसका ऑफिस घर ही था सफ़ाई – हाईजीन से कोई लेना देना नही हाँ कोई आने वाला हो तो ऊपरी सफ़ाई कर दी जाती समान एक जगह ठूँस दिया जाता…अगर कोई उनके किचन में गया तो थोड़ी और फ्रिज खोल लिया तो पूरी तौर पर खाने से विरक्ति हो जाती ( ज़्यादातर लोग इनकी गंदगी से वाक़िफ़ हो चुके थे और घर आने से बचते थे ) सज – धज कर जब बाहर जाते तो कोई रत्तिभर को अंदाज़ा नही लगा सकता था की ये सफ़ाई से कोसों दूर हैं…सोशल सर्कल बहुत बड़ा था घर से बाहर जाना ज्यादा होता था घर में लोगों का आना कम अगर आये भी तो ड्राइंगरूम तक सीमित पूरी चौकसी बरती जाती की ग़लती से भी कोई किचन या बेडरूम में ना चला जाये…सोशल सर्कल बड़ा तो सोशल मीडिया का सर्कल भी बड़ा…यहाँ ज़बान की जगह ऊँगलियों का काम था झूठ बोलना पति – पत्नी प्रेम का दिखावा करते पोस्ट डालते चिपक कर फ़ोटो खिंचवाते लेकिन घर के अंदर इन सब बातों का दूर – दूर तक कोई लेना – देना नही…एक दिन तो हद ही हो गई जब श्वेतांक ने अपने सोशल मीडिया पर ये डाला ” cleanliness is a godliness ” अब तो सबको टॉपिक मिल गया था हफ़्तेभर की गॉसिप का।

स्वरचित एवं मौलिक
( ममता सिंह देवा , 18/05/2020 )

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