शत - शत नमन भारत के कर्मवीरों को (कोरोना काल)

कोरोना महासंग्राम में आज की रचना उनको समर्पित है जो दिन रात अपनी सेवाओं के माध्यम से भूख प्यास त्याजकर देश की सेवा में अपना संपूर्ण योगदान दे रहे हैं और उनके लिए भी जो घर में रहकर देश को कोरोना से मुक्त कराने हेतु अपनी भूमिका निभा रहे है आज की कविता के माध्यम से उनको शत – शत नमन ।

शत – शत नमन उन कर्मवीरों को
जो अपना धर्म निभा रहे
कोरोना के इस महासंग्राम में
विशेषण भूमिका निभा रहे

शत-शत नमन उन कर्मवीरों को
परिवारों को छोड़कर अपने
डॉक्टर होने का फर्ज निभा रहे

शत – शत नमन उन कर्मवीरों को
मौत के मुंह में स्वयं को रखकर
मानवता का धर्म जो निभा रहे

शत – शत नमन उन कर्मवीरों को
अस्पतालों में 24 घंटे ड्यूटी निभा रहे

शत-शत नमन उन कर्मवीरों को
जो दूसरों को बचाने की खातिर
अपनी जान गवां रहे

शत-शत नमन उन कर्मवीरों को
भूखे स्वयं रहकर जो योद्धा
दूसरों का पेट पाल रहे

शत-शत नमन उन कर्मवीरों को
तपती धूप में जगह-जगह
नियमों का पालन करवा रहे

शत – शत नमन उन कर्मवीरों को
जो जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री पहुंचा रहे

शत-शत नमन उन कर्मवीरों को
जो अपना सर्वस्व लुटा रहे
इस महामारी के खिलाफ लड़कर
पूरे देश को बचा रहे

शत-शत नमन उन सभी कर्मवीरों को
जो डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, सैनिक, प्रेरक वक्ता, नेतागण, समाजसेवी, और साहित्यकार के रूप में अपनी – अपनी भूमिका निभा रहे ।

शत शत नमन उन कर्मवीरों को
जो कोरोना के इस महाकाल में जन – जन में जागरूकता फैला रहे

शत शत नमन उन कर्मवीरों को
जो घर के अंदर रहकर के
अपना फर्ज निभा रहे
देश के इस संक्रमण काल में
संपूर्ण भूमिका निभा रहे
संपूर्ण भूमिका निभा रहे

आप सभी से अनुरोध है कि सभी घर पर रहें और सुरक्षित रहें । घर से बाहर निकलकर स्वयं को और न ही दूसरों को नुकसान पहुंचाने की भूल करें । ध्यान रहे… घर में रहेगा इंडिया तभी तो बचेगा इंडिया आप अपना फर्ज निभाए और दूसरों को अपना फर्ज निभाने दीजिए । अगर हर परिवार यह ठान ले कि उसे अपने परिवार को बचाना है तो शायद कोई भी बाहर नहीं निकलेगा । आपको दूसरों की चिंता नहीं करनी तो मत चिंता कीजिए पर अपने परिवार वालों की जरूर चिंता कीजिए और अगर देश का हर व्यक्ति हर परिवार अपने परिवार को घर के अंदर ही रखेगा उसका ख्याल रखेगा उसे बाहर नहीं जाने देगा तो शायद हम इस महामारी पर काबू पा सकें । अपनी और अपने परिवार की चिंता अवश्य कीजिए तभी देश इस महामारी से बच पाएगा । याद रखिए देश है तो हम हैं हम हैं तो देश है एक सिक्के के दो पहलू हैं यह ।

डॉ. नीरू मोहन ‘ वागीश्वरी ‘

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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र...
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