Skip to content

शंकर आदि अनंत

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

घनाक्षरी

February 25, 2017

शंकर आदि अनंत, अविनाशी नित्यानन्द, आशुतोष महाकाल ,शिव ही ओंकार है
क्रोध इनका प्रचंड, गले लिपटे भुजंग, किया सदा असुरों का, शिव ने संहार है
चंद्र भाल जटा गंग, प्रिय इनको है भंग,नंदी गौरा गणपति , प्यारा परिवार है
नीलकंठ महादेव, देवों के भी हैं ये देव ,हम सबका नमन, इन्हें बारंबार है
डॉ अर्चना गुप्ता

Recommended
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है मगर छन भी आती कहीं रोशनी है न करती लबों से वो शिकवा शिकायत मगर बात नज़रों से... Read more
Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more