.
Skip to content

” ——————————————————— वक़्त के खजाने से ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गज़ल/गीतिका

January 16, 2017

ख़्वाब कई बुन डाले , खुशियों के मुस्काने से !
कुछ तो केश हो ही गये , वक़्त के खजाने से !!

रिश्ते तो बने बिगड़े , एक ही धरातल पर !
स्वार्थ खूब फूला फला , प्यार के बहाने से !!

नेह का निमंत्रण नहीं , अश्लीलता हवाओं में !
हो सुरभित यहां कलियां , खुशबू के ठिकाने पे !!

मस्ज़िद में अजाने हैं , औ घंटियां बजे मंदिर !
मन की खाई कैसे पटे , अब धर्म के मुहाने पे !!

बूढ़े माँ बापू यहां , अजनबी से लगने लगे !
घरवाली लगे प्यारी , रिश्तों के निभाने में !!

नेताओं का जमघट है , देशभक्त मिलते नहीं !
है जनता बनी मोहरा , बस कुर्सी हथियाने में !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
Recommended Posts
* वक़्त बदलेगा मेरा भी *
सबका वक़्त बदलता है ! एक दिन वक़्त बदलेगा मेरा भी !! आज चाहे वक़्त जैसा भी हो ! कल वक़्त बदलेगा मेरा भी !!... Read more
वक्त
वक्त से सीखा की वक्त किसी के लिये रूकता नहीं वक्त ने ही जताया,वक्त सब का एक सा चलता नहीं बदलते वक्त के साथ जो... Read more
मिल गये हैं ख़ुशी के ख़ज़ाने मुझे
मिल गये हैं ख़ुशी के ख़ज़ाने मुझे ==================== ये गरीबी लगी है डराने मुझे! तंगदस्ती लगी है सताने मुझे! वक़्त रुकता नहीं वो चला जा... Read more
वक्त
वक्त वक्त बर्बाद करना ही, जिंदगी बर्बाद करना है लिया है जन्म आज तो, फिर एक रोज़ मरना है मेहनती​और कर्मठ का सखा यह वक्त... Read more