वो सयानी हो गयी

किसको कहें की जिसके हमने, इतने तंज झेले थे,
कितने नखरें, कितने उल्फत, कितने रंज झेले थे।
उसकी वो बचकानी हरकत, अब जाफरानी हो गयी,
आज जो मिली मुद्दतो बाद, लगा वो सयानी हो गयी।।

घण्टो बैठी रहती थी, कंधे पर रख कर के सर,
अब तो वो बातें पुरानी, सारी कहानी हो गयी।
कल तक पुकारा करते थे, उसे जिस भी नाम से,
आज उसके नजर में वो, बदजुबानी हो गयी।।

उसकी वो बचकानी हरकत, अब जाफरानी हो गयी,
आज जो मिली मुद्दतो बाद, लगा वो सयानी हो गयी।।

छोड़ जाती थी जो वो, जुल्फों के रेशे मेरे सीने पर,
जिंदगी भर की फकत, अब वो मेरी निशानी हो गयी।
आज बतलाते हो तुम, किस्सा जिसकी नफासत का,
सदियों पहले उनके तिलों पर, निगहबानी हो गयी।।

उसकी वो बचकानी हरकत, अब जाफरानी हो गयी,
आज जो मिली मुद्दतो बाद, लगा वो सयानी हो गयी।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०३/०२/२०१९ )

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