कविता · Reading time: 1 minute

वो शब्द है “माँ”

हर सम्मान से बड़ा होता है उसका मान
हर मदिर मस्जिद से बड़ी है उसकी शान,

जो जान से भी ज्यादा चाहे तुमको
जो अरमान से ज्यादा पाए तुमको,
वो शब्द है “माँ” जिसपर न्योछावर भगवान।

हर दर्द से बड़ा है उसका अपमान
धरती से मिट जाए उस बीन इंसान,

जो जीवन देकर भी देती जीवन का दान,
जो ना हो तो ना हो हम ना बने कोई महान,
वो शब्द है “माँ” जिसपर न्योछावर भगवान।

हर राष्टीय गान से बड़ा है उसका जीवन गान
धरती आकाश, परबर्ह्म का उसमे विश्वास ज्ञान,

जो भर देती है इस दुनियां में अपनी भी सांस
जिसकी ममता के आगे फीकी पड़ जाती हर आस,
वो शब्द है “माँ” जिसका सम्मान करना सबसे खास।
तनहा शायर हूँ

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