वो लम्हे

अपनी धड़कनों से कुछ ऐसे मेरा नाम लो……
ये वक़्त रुक जाए, इस लम्हे को थाम लो….
तेरे आंखों में झलक है ऐसी मेरे प्यार की…..
साहिल पे जैसे ढलती हसीन शाम हो……
लफ़्ज़ों से होता नहीं इजहार हमसे प्यार का…..
बस मेरी आंखों में देख कर ख़ुद को पहचान लो….
जैसा तरसता है सेहरा शबनम को छूने को….
कभी वैसे रब से तुम भी मुझे मांग लो….
अपनी धड़कनों से कुछ ऐसे मेरा नाम लो…
ये वक़्त रुक जाए इस लम्हे को थाम लो…।।

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