कविता · Reading time: 1 minute

*** वो मुझे अपनाकर भी ***

मै जिसे
प्यार करता रहा
मासूम समझ कर
वो ही मुझे
जख़्म पे जख़्म
देता रहा
मैंने कभी
उसको
नहीं कहा
कि
मैं तुमसे
प्यार
करता हूँ
पर वो
वक्त बेवक्त
ये कहता रहा
मैं तुम्हे बहुत
प्यार करता हूँ
मैं तुम्हारे बिना
जी नहीं सकता
पर
ग़म इतना
सताता रहा
मुझे कि वो
मुझे
अपनाकर भी
अपना ना हो सका ।।
?मधुप बैरागी

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Author
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप 'बैरागी' के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन…
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