कविता · Reading time: 1 minute

-@- वो भाग्यशाली होते हैं -@-

जिन्दगी के सब कामों से
निपट लेने के बाद
या तो पत्नी या पति
वृदावस्था में अकेले रह जाते हैं
जिनको पाल पोसा कर बड़ा किया
वो भी आँखों से
ओझल हो जाते हैं

वक्त ऐसा भी आता है
न हाथ -पैर खुद के काम करते
न जुबान से शब्द निकल सकते
बड़ी विकट स्थिति से
जिन्दगी के दिन गुजर पाते हैं

बड़ा भाग्यशाली होता है
वो इंसान इस उम्र में
जिस के जज्बात उस के घर
के लोग समझ पाते हैं
तनहाई में कट जाती है
एक एक रात
लगता है जुबान पर
ताले लग जाते हैं

किस वक्त कौन कुछ सुना दे
भूखे पेट ही रह जाते हैं
जिन्दगी खुद की बोझ बन
जाती है खुद पर ही
न चल पाते हैं
न ही सो कर नींद ले पाते हैं

बड़ी मुश्किल घडी होती है
आँखों में आंसू लिए
अपने साथी को याद करते
करते ही सांस एक दिन रूक जाती है

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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