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वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी

Akib Javed

Akib Javed

गीत

November 9, 2017

वो जर्रा जर्रा
नफ़्स पे हैं वजूद तेरा
तू दिखे हैं
मुझे अब तो हर जगह
वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी(2)
तुझे सोचूँ, तुझे पाऊँ,
तेरे ख्याल ही आये हर जगह
वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी(2)
समुन्दर,चाँद, सितारे,वो आसमाँ
मौसम के बदले मिज़ाज में तू
तुझे पाऊँ, तुझे चाहूँ मैं जानेज़ा
वो कशिश,वो चाहत मेरी
मेरी तस्सवुर में भी तू
वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी(2)
तेरा ही नाम आये
अब लबो रुखसार में मेरे
तू था ही नही मेरा,ये कभी सोचा ना था
तेरी परछाई अब मेरे साथ रहे
तेरा हाथ अब मेरे हाथों में रहे
वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी(2)
वादा था तेरा
साथ जन्म साथ निभाओगे सनम
तो फिर इस हाल में क्यू छोड़ कर जाओगे सनम
सोचा था वफ़ा करोगे तुम
हमेशा साथ रहोगे तुम
वो बाते,वो इरादे,वो तन्हाई मेरी(3)

®आकिब जावेद

Author
Akib Javed
कुछ लिखना चाहता हूँ,सोचता हूँ,शब्दो से खेलता हूँ,सीखता हूँ,लिखता हूँ।।
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