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वो बचपन के दिन !

Er Dev Anand

Er Dev Anand

कविता

November 14, 2017

वो बचपन के दिन भी
कितने सुहाने थे
हम अपने में मस्त
औरों से बेगाने थे ।
ना पता था चिंता क्या है ?
नासमझ थी चिंतित क्यों है ?
ना पता था डर क्या है ?
ना लगता था कोई डरावना क्यों है ?
खिल रहे थे जीवन में
नित्य ढेर सारे रंग
पता था
बस मस्ती और उमंग ।
बदला सब कुछ धीरे-धीरे
सीखा सब कुछ हमने भी हौले-हौले
कुछ अपनों से
कुछ मित्रों से
कुछ किसी सबक से
कुछ किसी नसीहत से ।
उलझे फिर हम भी
इस दुनियादारी में
सुलझ न सके फिर कभी
इस माया नगरी में ।
अब तो वो पल
जो छिपा है
सिर्फ यादों में
आती है
फिर वो याद
जो दिलाती है
फिर से हमें
वो बचपन के दिन………………

(आप सभी को बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं)

Author
Er Dev Anand
दिमाग से इंजीनियर दिल से रचनाकार ! वस्तुतः मैं कोई रचनाकार नहीं हूँ, मैं एक इंजीनियर हूँ । मैं वही लिखता हूं जो मेरी आंखें देखती हैं और दिल समझता है उन्हें को कलम के सहारे में व्यक्त कर देता... Read more
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