गीत · Reading time: 1 minute

वो बचपन का मिलन

ये सावन ये पूर्वा….
ये बद्ररी ये बरखा…..
ये यादों का फेरा….
ये विरह का घेरा…..
ये रिमझिम सी बूंदे…
लगाती अगन…..
ये जवानी की तपन…
वो बचपन का मिलन..

वो लेकर किनारा
चौखट का सहारा ..
वो दरवाजों से
देखना तुम्हारा …
वो सीं कर लबों को
अनकहे वचन….
वो नादान कसमें
वो मोहब्बत के समन..
ये जवानी की तपन
वो बचपन का मिलन..

वो मंदिर के बहाने
घरों से निकलना…
वो छुपते छुपाते
खतों का बदलना ..
वो बूट्टे के खेतों में
जाने की लगन….
वो बतलाना औरों से
बढाता जलन….
ये जवानी की तपन
वो बचपन का मिलन..

ये सावन ये पूर्वा….
ये बद्ररी ये बरखा…..
ये यादों का फेरा….
ये विरह का घेरा…..
ये रिमझिम सी बूंदे…
लगाती अगन…..
ये जवानी की तपन…
वो बचपन का मिलन..

देवेन्द्र कुमार- अम्बर
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