गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

वो नज़ाकत नही छोड़े हैं

हर सितम सह मुहब्बत नही छोड़े हैं
जग करे कुछ भी चाहत नही छोड़े हैं

जग सताता रहा यूँ मुझे हर घड़ी
देखिये हम शराफत नही छोड़े हैं

वो गई छोड़ हमको मगर क्या करें
राह तकने की आदत नही छोड़े हैं

ज़ख्म तूने दिए हैं मुझे उम्र भर
हम तुम्हारी हिफाजत नही छोड़े हैं

जान ले ले मेरा तू बड़े शौक से
इश्क की हम रवायत नही छोड़े हैं

पूजते हैं सभी तो ख़ुदा को यहाँ
हम तुम्हारी इबादत नही छोड़े हैं

बस उठाते रहे नाज़ उनके सभी
आज भी वो नज़ाकत नही छोड़े है

– “अश्क़”

1 Like · 35 Views
Like
31 Posts · 1k Views
You may also like:
Loading...