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वो दिन

वो दिन आज भी…
जब तुम औऱ मै आपस मे
मिले थे पहली बार
याद आता हैं वो पल
गले मिलने की वो बात।
वो दिन आज भी…
तुम तो चले आये थे मिलने
मेरे एक निमंत्रण पर
ओर पीछे छोड़ गए एक
प्यारा सा अहसास।
वो दिन आज भी…
कुछ बाते जो छोड़ गए थे
मेरे लिए प्रश्न जैसे
मै खोजती रही उत्तर दर उत्तर
खंगालती रही बात दर बात।
वो दिन आज भी…
साथ बैठ की थी हमने ढेर बाते
मिलने का वादा लिए साथ हम
लौट आये अपने अपने गंतव्य
फिर से कभी मिलने के लिए
वो दिन आज भी…
अचानक फिर मिली मैं तुमसे
कुछ अपनेपन का अहसाह लिए
औऱ तुमने भी मेरे अंतर्मन को
परख कर जाना मुझे करीब से
वो दिन आज भी…
अब हम साथ साथ हैं
हर रोज मिलन के लिए
हर बार, बार- बार, हम साथ- साथ
हमेशा के लिए दोनों हम दोनों

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पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं अनेक समाचार पत्रों में लेख,कविताएं प्रकाशित कृतियां- 1-काव्यमंजूषा 2-मातृशक्ति 3-शब्दोत्सव 4-महापुरुष 5-काव्य शब्दलहर 6-अम्बेडकर जीवन…
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