वो तुम थी

आँशिया छोड़ दे गुमनामी का
देख मकाँ तेरा तबाह हो रहा,
लौट जा घर को बशिंदे
इश्क नहीं, अब ये, गुनाह हो रहा है,

कह दो जला दे यादें मेंरी,
मै खाक, हो जाऊंगा,
पाप तो अब कर ही दिया
शायद अब पाक हो जाऊंगा,,

परिंदो को बता दे
जमीं देख ले,
शहर गुमनामी का है
बशिंदा यंहा का पता बता जाऊँगा,

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Prabal Abhi
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