वो चिराग

बिखेर कर राख किनारों से ।
बुझ गए वो चिराग़ रातों के ।
रोशन शमा एक रात की ख़ातिर ,
दिन हुए हवाले फिर उजालों के ।
…. विवेक दुबे”निश्चल”@…

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