कविता · Reading time: 1 minute

वो क्या है!!

तुम हो कि हद मे रह नहीं पाते
हम है कि यह सब सह नहीं पाते।

वो क्या है जो तुम सुनने को बेताब हो
वो क्या है जो हम कभी कह नहीं पाते।

वो क्या है जिसे दुनिया सुनने को बेताब है
वो क्या है जिसके लफ्ज़ कहे नहीं जाते।

वो क्या है जिसकी राह रात भर तकते हैं
वो क्या है जो दिन में देख नहीं पाते ।

वो क्या है जो गुलों से भी नाजुक है
वो क्या है जिसे तूफ़ान भी हिला नहीं पाते।

वो क्या है जो समंदर से भी बड़ा है
वो क्या है जिसमे कतरे भी समां नहीं पाते।

वो क्या है जिसे दुनिया भुलाने में लगी है
वो क्या है जिसके करिश्मे भुलाये नहीं जाते।

वो क्या है जिसे आसानी से समझ लेते है
वो क्या है जो समझदार समझ नहीं पाते।

वो क्या है जो हर मज़हब में मौजूद है
वो क्या है जिसे मज़हबी समझ नहीं पाते।

वो क्या है जो ख़ास सभी का होता है
वो क्या है जिसके ख़ास सब रह नहीं पाते।

वो क्या है जो लोगों को बदल देता है
वो क्या है जो इंसान बदल नही पाते।

वो क्या है जो रूह में इस कदर मौजूद है
कि अक्सर ज़हन में उसे ला नहीं पाते।

वो क्या है जो शरीक है हर कदम पर
वो क्या है जिस से कदम मिला नहीं पाते।

वो क्या है जो में पूछता आया हूँ
वो क्या है जो तुम सब बता नहीं पाते।

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