वो कोई ख़ास नही

कोई तुमसे अगर पूछे
की कौन लगता हूँ मैं तेरा
तो तुम बस इतना बता देना
एक दोस्त है मेरा कच्चा सा
अक्ल से जरा बच्चा सा
थोड़ा झूठा ,थोड़ा सच्चा सा

तुमसे पूछे कोई क्या ख़ास है मुझमे
तो तुम बस इतना बता देना
वो कुछ नही बस
मेरे सफ़र का हिस्सा है
वो तो बस कोई किस्सा है
नींदों में बस जाए
वो बस वही सपना है
वो तो मेरा अपना है

तुमसे अगर पूछे कोई
क्यों पसंद करती हो तुम उसे
तो तुम बस इतना बता देना
वो तो एक हवा का झोंका है
बेगानो के वेश में वो अपना जैसा दिखता है
चुपचाप सा रहता है
कुछ अनकही बाते लिखता है
कभी अनसुलझा सा दिखता है
वो कोई खास नहीं
बस मेरी आँखों में
यादें बन कर ठहरता है
कभी आँसू बन कर लुढ़कता है–अभिषेक राजहंस

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