वो करना है जो ठाना है -- गज़ल्

वो करना है जो ठाना है
हर मुश्किल से टकराना है

जिस धरती पर है जन्म लिया
उसका भी कर्ज चुकाना है

दीन दुखी की सेवा करके
अब मानव धर्म कमाना है

दौलत का लालच मत करना
सब छोड़ यहीं पर जाना है

चन्द दिनों की साँसों में भी
क्या लड़ना और लड़ाना है

जीवन का भी एक गणित है
कुछ खो कर ही कुछ पाना है

जन्मों का बंधन है शादी
दोनों को कौल निभाना है

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लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी],...
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