कविता · Reading time: 1 minute

वो आजाद हैं

वो आजाद हैं

वो
पक्षियों का जोड़ा
बैठा है
पेड़ पर
लड़ा रहे हैं चोंच
कर रहे हैं कलोल
कर रहे हैं मस्ती
होकर बेपरवाह
दकियानूसी रस्मों से
खाप-पंचायतों से
गोत्र-विवादों से
जाति-मजहबों से
वो हैं आजाद
ये सब हैं
इंसान के लिए
लड़ते रहने के लिए
भिड़ते रहने के लिए

-विनोद सिल्ला

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