वो अज़ब सी लड़की ....

“वो “अकेली है भी और नहीं भी
वो सागर सी टकराई मुसीबतों से
और दरिया बन बही भी
वो वक्त के पन्ने पलटती है
पर उलझती नही है
वो ओस की बूंदों सी
जीवन के पात पर अटकती है
पर ढुलकती नही है
वो अपनी आंख से आंसू नही छलकने देती
इसलिये नहीं कि वो
दुनिया की खिल्ली से डरती है
इसलिये कि उसको प्यार है अपनी सुंदरता से
वो ठोकर पर रखती है
तंज सभी ज़माने के
वो चक्कर मे पड़ी हुई है
न जाने क्या कुछ कमाने के
रात ऊंघते बीत गयी है
आंखों को सोने नहीं दिया उसने
खुद को पत्थर बना लिया है
दिल को रोने नहीं दिया उसने
वो खूंटी पर टांग देती
कल की सभी पुराने बातें
वो नये दिन की अास में
गुजार देती है सारी रातें
वो टूटती तो है पर बिखरती नहीं
बस कोई मुस्कुरा कर देख दे इतना ही बहुत है
पूरे दिन की थकान भी उसको अखरती नहीं
वो अपनी ख्वाहिशों से इतर
सब के ख्वाब सजाती है
वो सोती है सबसे पीछे और
तडके ही जग जाती है
वो बेबाक बोलने का हौंसला रखती है
वो सासों की गर्माहट मे रिश्तों का घोंसला रखती है!
वो अज़ब सी लड़की ……..
है वो गज़ब की लड़की ……….

©®प्रियंका मिश्रा _प्रिया

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