कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

#कुंडलिया//वोट की चोट

पारी पहली वोट की , लगती किसको चोट।
जनता खेले खेल तो , निकले सबकी खोट।।
निकले सबकी खोट , चकनाचूर हों सपने।
पाँच साल का राज , गया हाथों से अपने।
इंतज़ार में बैठ , करो तुम चर्चा सारी।
किसकी होगी जीत , बताएगी पर पारी।

झूठी बातें बोलकर , एक बार दिल जीत।
हांडी फिरसे काट की , चढ़ती कभी न मीत।।
चढ़ती कभी न मीत , मिले जैसे को तैसा।
मत है ये अनमोल , न बेचो लेकर पैसा।
भेड़-भेड़िया खेल , चला वहीं बुद्धि रूठी।
दशक देख कर सात , न सहना बातें झूठी।

जीते लालच आज तो , होगी भारी भूल।
उनके होंगे फूल सब , अपने होंंगे शूल।।
अपने होंंगे शूल , पाँच साल ख़ूब रोना।
सही चुनो सरकार , बेंच कर घोड़े सोना।
समझो अब तो मीत , साल हैं कितने बीते।
झूठे करते राज , बरगलाकर हैं जीते।

सबका समझे मर्ज़ जो , चुनना वो सरकार।
दोनों पार्टी झूठ की , बदलो फिर हर बार।।
बदलो फिर हर बार , अगर बात समझ आए।
बार-बार की जीत , सदा औक़ात भुलाए।
सुन प्रीतम की बात , शुक्र हो जागो रबका।
वरना लेना देख , बुरा हाल बने सबका।

#आर.एस.बी.प्रीतम

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