वोट की चोट

वोट की चोट
—————-
पारी पहली वोट की,लगती किसको चोट।
जनता खेले खेल तो,निकले सबकी खोट।।
निकले सबकी खोट,चकनाचूर हों सपने।
पाँच साल का राज,गया हाथों से अपने।
इंतज़ार में बैठ,करो तुम चर्चा सारी।
किसकी होगी जीत,यही बताएगी पारी।

झूठी बातें फैंक के,एक बार हो जीत।
हांडी फिरसे काट की,चढ़े कभी ना मीत।।
चढ़े कभी ना मीत,मिले जैसे को तैसा।
मत है ये अनमोल,खरीद सके ना पैसा।
भेड़-भेड़िया खेल,चला वहीं बुद्धि रूठी।
दशक बीते सात,करते न बातें झूठी।

जीता लालच आज तो,होगी भारी भूल।
उनके होंगे फूल सब,अपनी होगी धूल।।
अपनी होगी धूल,पाँच साल ख़ूब रोना।
सही चुनो सरकार,घोड़े बेंच कर सोना।
समझो अब तो मीत,साल हैं कितने बीते।
झूठे करते राज,तुम हारे कब हो जीते।

सबका समझे मर्ज़ जो,चुनना वो सरकार।
दोनों पार्टी झूठ की,बदलो फिर हर बार।।
बदलो फिर हर बार,अगर बात समझ आए।
बार-बार की जीत,औक़ात है भूलाए।
सुन प्रीतम की बात,जागो शुक्र हो रबका।
वरना लेना देख,हाल क्या होगा सबका।

आर.एस.बी.प्रीतम
————————

Sahityapedia Publishing
Like Comment 0
Views 28

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share

Do you want to publish your book?

Sahityapedia's Book Publishing Package only in ₹ 9,990/-

  • Premium Quality
  • 50 Author copies
  • Sale on Amazon, Flipkart etc.
  • Monthly royalty payments

Click this link to know more- https://publish.sahityapedia.com/pricing

Whatsapp or call us at 9618066119
(Monday to Saturday, 9 AM to 9 PM)

*This is a limited time offer. GST extra.