वोटों के सौदागर

जनता को नींद में झोंका और अपने लिए चादर बन गए।
दूजे की चीज तीजे को दे दिया और करुणाकर बन गए।
जिनको देखकर जम्भाई आती हो मतदाताओं को,
वही ग़रीबो के मसीहा और वोटों के सौदागर बन गए।
– सिद्धार्थ पाण्डेय

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