वैसी दीवाली

वैसी दीवाली
—————
कभी-कभी दीवाली किसी त्यौहार का नाम नहीं होता ,
तब दीवाली केवल एक मुस्कान का नाम होता है !
कभी-कभी दीवाली होती नहीं केवल छप्पन पकवानों से,
तब दीवाली केवल भरे पेट सोने का नाम होता है !
कभी-कभी दीवाली सोना-चाँदी खरीद कर नहीं मनाई जाती,
तब दीवाली तन पर कपड़ों की एक दूसरी जोड़ी महसूस करने का नाम होता है !
कभी-कभी दीवाली अपनों को महंगे उपहार बाँट कर नहीं मनती,
तब दीवाली किसी बेसहारा कांधे पर हाथ रख सहारा देने का नाम होता है!
कभी-कभी दीवाली के बिना भी दीवाली हो जाती है,
तब जब कोई इंसान इंसानियत का जश्न मना रहा होता है !
@Sugyata
Copyright reserved

Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share