वैश्विक महामारी कोरोना

वैश्विक महामारी कोरोना एशिया महाद्वीप के उस देश में जो विश्व में जनसंख्या के दृष्टि से प्रथम स्थान रखने वाला देश चीन के वुहान शहर में कोरोना जैसी महामारी की उत्पत्ति हुई है,कोरोना वायरस महामारी तीव्र गति से विश्व में फैल चुकी है,कोरोना जैसी महामारी संक्रमण से संपूर्ण विश्व त्राहि-त्राहि कर रहा है,इटली,फ्रांस,रूस,अमेरिका जैसे उन्नतशील देश विवश नजर आ रहे हैं,क्षेत्रफल के दृष्टि से सातवां,जनसंख्या के दृष्टि से द्वितीय स्थान पर विद्यमान आर्यावर्त,ऋषि मुनियों देवी देवताओं का देश कहा जाने वाला देश आर्यावर्त भी कोरोना जैसी महामारी से अछूता नहीं रहा

कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने 24 मार्च को इक्कीस दिनों के लिए संपूर्ण भारत में लॉकडॉउन लागू रखने का आदेश जारी किया,इस निर्णय से पूर्व 22 मार्च को जनता कर्फ्यू चौदह घंटा के लिए भारत के जनता से अपील किया,जिसे संपूर्ण भारतवासी अपना अपना कर्तव्य समझ अपने देश के लिए अज्ञा पूर्वक आदेश का पालन किया

लॉक डॉउन प्रथम चरण 24 मार्च 2020 से 14 अप्रैल 2020,द्वितीय चरण 15 अप्रैल 2020 से 03 मई 2020,तृतीय चरण 04 मई 2020 से 17 मई 2020 और चतुर्थ चरण 18 मई 2020 से 31 मई 2020 तक स्थिति को देखते हुए,भारतीय प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने लॉकडॉउन के आदेश घोषित किया,जिसे सम्पूर्ण भारतीय जनता ने स्वीकार किया

ऐसी आपातकालीन विषम परिस्थितियों में अस्पतालों, किराना की दुकानों,फलों,सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी गैर आवश्यक सेवाएं और दुकानें बंद रहेंगी,जिसमें 135.2 करोड़ भारतीय जनसंख्या वैश्विक महामारी कोरोना से संघर्षरत है

जिसमें हमारे कितने सुरक्षाकर्मी,डाक्टर,नर्स,पुलिस, ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों,सफाई कर्मियों जैसे कर्मचारी शहीद हो गए,18 मई 2020 तक 3029 भारतीय भाई बंधु,माताएं,बहने लड़ते हुए, कोरोना संक्रमण जैसी महामारी में अपने प्राण गवा खुदा के पास चले गए

सरकार की अनेक सुविधाओं के उपरांत समाचार एजेंसी बहुत से सत्य को छुपा रहे हैं,अनेक प्रवासी मजदूर जो दिल्ली,पंजाब,हरियाणा,तमिलनाडु,कोलकाता और गुजरात से अपने प्रांत अपने ग्राम आने कों विवश है,वह छः सौ,सात सौ,बारह बारह सौ किमी तक पैदल,पलायन पर विवश है,ऐसे गरीब लाचार मजदूरों को अनेक कठिनाइयों को सहना पड़ रहा है,भूख प्यास से मर रहे हैं,तड़प रहे हैं,जिसे हमारी समाचार एजेंसी नहीं दिखा रही हैं,गुजरात राज्य में सूरत जिला के डिंडोली में रहने वाला एक युवक उद्योग धंधे के बंद हो जाने से रूम मालिक और साथी के द्वारा भोजन न मिलने पर स्वयं को फांसी लगाने पर मजबूर हो गया,पड़ोसी लोगों के देखने पर उसे सूरत के सिविल अस्पताल में भर्ती करा कर उसे बचाया गया,और उसे अब उसके प्रांत भेजा गया,ऐसी भूखमरी लाचारी आपातकालीन जैसी हालात पैदा कर दिया है

सरकार जिन मरीजों को कोरोना वायरस कोविड -19 से प्रभावित पा रही है,उसका इलाज़ कर,उन्हें चौदह से इक्कीस दिन के लिए क्वैरैंटीन कर रही हैं,चौदहवीं शताब्दी में क्वैरैंटीन शब्द की उत्पत्ति हुआ था,क्वैरैंटीन शब्द लोटाथापा द्वारा कहा गया है,यह क्वाडाजिरा और इटली भाषा के कवारांता से मिल कर बना है,इन दोनों शब्दों का मतलब 40 होता है,यह चौदहवीं शताब्दी में इटली भाषा का शब्द है,इसका अर्थ 40 दिन होता है,1348 से 1359 में फ्लेग से यूरोप की तीस प्रतिशत आबादी मौत के मुंह में समा गई थी,इसके बाद 1377 में क्रोएशिया(city-state of Ragus)ने अपने महा द्वीप पर आने वालों जहाजों और उन पर मौजूद लोगों को एक द्वीप पर 30 दिनों तक अलग रहने का आदेश जारी किया

सरकार कोरोना का सही तरीके से इलाज कर क्वैरैंटीन कर सही इलाज के साथ सही दिशा निर्देश दे रही है
“दो गज दूरी बहुत जरूरी”
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नारा है
हाथ ना मिलाएं,नमस्ते भारत का पालन करों,अति आवश्यक कार्य से ही घर से बाहर निकलो,बहुत से ऐसे व्यक्ति हैं,जो रेड जोन से ग्रीन जोन अपने ग्राम में आकर स्वयं से क्वैरैंटीन नहीं हो रहे हैं,वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को बढ़ाने में आतुर हैं,ऐसे विकट परिस्थिति में व्यक्तियों को ध्यान रखना होगा,सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन स्वयं करना होगा

दुख हो रहा है,कि कल कारखानों पर ताले लटके हुए हैं,बेचारे मजदूर भूख से बिलख रहे हैं,भोजन तक नहीं मिल पा रहा है,वह लाचार है,पलायन को,अपने कुछ जरूरी सामान गठरी को सर पर लादे,ठेला,ऑटोरिक्शा,साईकल,पैदल,ही अपने ग्राम की तरफ बढ़ चले है,कितने भाई बन्धु,माताएं,बहनों ने कोरोना से नहीं,भूख से मर गए,चलते हुए दम तोड़ दिया,पांच सौ,सात सौ,बारह बारह,तेरह तेरह सौ किमी का सफर हफ्तों में तय कर अपने ग्राम पहुंच रहे हैं,वह चौदह दिन एकांत में क्वैरैंटीन हो अपना फ़र्ज़ निभा रहे है,विकट परिस्थिति से एक जुट हो सम्पूर्ण भारतीय जनता लड़त रही हैं

इसी बीच कहीं से सूचना प्राप्त होती है,कि प्रवासी मजदूर भूख प्यास से व्याकुल रेल मार्ग पटरी पर पैदल चलते हुए,शारीरिक रूप से कमजोर हो पटरी पर ही लेट गए,जिसे मालगाड़ी ने काटकर उन्हें इस दुनिया से विदा किया,प्रवासी मजदूरों को छात्रों को ले जा रहे बसों की भिड़ंत मन व्यथा को द्रवित कर दे रही हैं,भगवान ऐसी दुर्घटना से बचाएं,और प्रवासी मजदूरों की आत्मा को शांति प्रदान करे

हम सभी भारतीय महापुरुष परीक्षा के घड़ी में दृढ़ता से अदम्य साहस का परिचय प्रेषित करते आ रहे हैं,इतिहास गवाह है,जो कार्य कोई देश नहीं किया है,वह कार्य भारत देश ने कर दिखाया है,गणित में दशमलव,शून्य की खोज,राजनीति में चाणक्य नीति,जैसे अनेक सूत्र प्रदान किया है,स्वामी विवेकानंद महापंडित राहुल सांकृत्यायन,प्रेमचंद,रामधारी सिंह दिनकर,भगत सिंह,इंदिरा गांधी,मनुबाई(झांसी की रानी) इत्यादि सिंह शेरनी को जन्म देने वाली माताएं,स्थान देने वाली धरती भारत पर हमें गर्व होना चाहिए इनके त्याग से हमें आज के आधुनिक युग में कॉविड-19 जैसी महामारी से धीर गंभीर धैर्य के साथ दूरी बनाते हुए,अपने कार्य मंजिल की तरफ अग्रसर होना है

दैनिक विकट परिस्थिति में स्वयं और अपने सभी संबंधियों को साहस विश्वास देना होगा,कॉविड-19 जैसी महामारी से निजात पाना है, हम अभी भारतीय विश्व ऐसी महामारी से जल्द ही निजात पाएंगे,क्योंकि हम हमेशा अजय थे,अजय हैं,अजय रहेंगे,फ्लेग,हैजा,चेचक,पोलियो जैसी महामारी को हरा सकते हैं, कॉविड-19 कौन सी बड़ी बात है,बस हम सभी को धैर्य से साहस से भारतीय सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना है

यही उचित समय है,कि हम आप सब देश भक्ति के अग्नि परीक्षा में इस दृढ़ता से संयम से इस रण में डटे रहे है,कि समय के साथ हम विजय ध्वजा को फहरा सके,क्वैरैंटीन,सैनेटराईजर,दो गज दूरी,सरकारी दिशा निर्देश का पालन हम सभी का सर्वप्रथम धर्म है,और अपना यही धर्म तत्कालीन हमारी रक्षा करेगा…!जय हिंद जय भारत
राइटर:- इंजी. नवनीत पाण्डेय सेवटा(चंकी)

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नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-...
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