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वैश्विक महामारी एवं सदी की त्रासदी : कोरोना ©डॉ.अमित कुमार दवे,खड़गदा

वैश्विक महामारी एवं सदी की त्रासदी : कोरोना
©डॉ.अमित कुमार दवे,खड़गदा
कोरोना से संपूर्ण विश्व इस समय त्रासदी से युक्त है । विश्व की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था एवं आधुनिकतम सुविधाओं से युक्त देश भी इस महामारी से पूर्ण रूप से ग्रसित हो चुके हैं। हर देश का राष्ट्राध्यक्ष अपनी विफलताओं को बयां कर रहा है । हर देश अपनी जन सुविधाओं को देखते हुए अपनी हार को विश्व पटल पर आम जनता, वैश्विक जनता के सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हैं और इन सभी उदाहरणों के माध्यम से विश्व को,वैश्विक प्रबंधन को, विश्व प्रशासन को यह बताना चाह रहा है कि अपने आप को संभालो।
अपने आप को बचाना ही राष्ट्र की सुरक्षा है । कुछ जिम्मेदार लोग गैर जिम्मेदाराना व्यवहार प्रस्तुत कर रहे हैं , जो उचित नहीं है । उनका यही व्यवहार उनकी मानसिकता को, उनकी गैर जिम्मेदाराना प्रवृत्ति को उजागर कर रहा है । वैश्विक महामारी को इस प्रकार नजरअंदाज करते हुए मृत्यु को साथ में रखते हुए अपने व्यवहार को प्रस्तुत करना कतई परिवार के, समाज के ,राष्ट्र के अथवा विश्व के हित में नहीं हैै ।
हम आम नागरिकों को वैश्विक परिस्थितियों को उदाहरण रूप में लेते हुए अपने स्वास्थ्य, परिवार के स्वास्थ्य एवं समाज के स्वास्थ्य हेतु संयम को अपनाना है । नियंत्रण आधारित जीवनशैली को अपनना है।
हमें वही करना है जो अपने एवं वैश्विक जीवन हेतु महत्त्वपूर्ण है। जब तक आवश्यकता नहीं है तब तक हमें अपने निवास से बाहर नहीं निकलना है । हमें अपने हाथ पैरों को बार-बार धोते रहना है । साथ ही मास्क आदि से अपने आप को सुरक्षित रखना है । हमें सैनिटाइजर से हाथ धोना, साबुन से हाथ धोना आदि व्यवहार अथवा उपाय हमें कभी भी पूर्ण रूप से कोरोना मुक्त नहीं करवा सकते ।
हमें कोरोना मुक्त होने के लिए आत्मनियंत्रण , संयम एवं स्वयं सुरक्षा को ध्यान में रखना है । जब तक गैर जिम्मेदाराना व्यवहार प्रस्तुत करते रहेंगे , इस वैश्विक महामारी की खिल्ली उड़ाते रहेंगे , वैश्विक सलाह को अनुभव एवं उदाहरण के रूप में नहीं समझ कर यदि हम अपने ही मन के अनुसार चलते रहे तो निश्चित ही हम उस त्रासदी को अपने हाथों से बुला लेंगे , जिसकी आप और हम कल्पना नहीं कर सकते । यदि हमारे देेश में चीन ,इटली , स्पेन,अमेरिका आदि जैसी कोरोना की त्रासदी बढ़ गई तो निश्चित ही हम उस तबाही को रोकने में समर्थ नहीं हो पाएंगे । क्योंकि हमारी जन एवं स्वास्थ्य सेवाएँ जन एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उन देशों के स्तरर की नहीं हैं । साथ ही उन देशों की अर्थव्यवस्था ,शिक्षा व्यवस्था , नागरिकों की जिम्मेदारी हमारे देश से कहीं गुना बेहतर है । तथापि यह देश कोराना को नियंत्रित करने में अपनी असमर्थता वैश्विक पटल के सम्मुख स्पष्ट कर चुके हैं। इन्हीं देश के राष्ट्र प्रमुखों ने इस तरह की महामारी से बचने के लिए भारतीय राष्ट्राध्यक्ष एवं नेताओं से सहयोग की अपेक्षा की है, नेतृत्व की अपेक्षा की है । वह अच्छे से जानते हैं कि यह देश इस महामारी से निकलने में यदि स्वयं को समर्थ करता है तो निश्चित ही यह वैश्विक जनसंघ के लिए, जन समुदाय के लिए सहयोगी होगा। यदि ऐसा नहीं होता है और भारत में कोरोना का संक्रमण बढ़ने लगेगा तो निश्चित ही पूरा विश्व इस संक्रमण से ग्रसित होकर अनगिनत जानों से हाथ धो बैठेगा। देशवासियों ! भारत के जिम्मेदार नागरिकों , हम 130 करोड़ लोग यदि प्रतिबंद्ध हो करके इस वैश्विक महामारी कोरोना के विरुद्ध अपने घर से ही, अपने खुद से ही, समझदारी पूर्ण युद्ध की शुरुआत करें तो निश्चित ही हम वैश्विक समुदाय को विश्व पटल पर कोराना से मुक्त होने में सहयोग प्रदान कर सकेंगे।
हमने अपने इतिहास से लगाकर अभी तक विविध महामारियों, विविध विपत्तियों को बखूबी तरीकों से प्रबंधित कर अपने आप को विकास के पथ पर उन्नत जीवन की ओर अग्रसर किया है । इस बार पुनः हमें अपने व्यवहार को, अपने पुरा अस्तित्व को जीवन्त करना आवश्यक लग रहा है । हम अपनी संयमित जीवनचर्या को अपनाकर अपने आप को सुरक्षित-संरक्षित एवं वैश्विक त्रासदी को विश्व से मुक्त करने में सहयोग दे सकते हैं ।

हमने हमेशा से विश्व को सही मार्ग दिखाया है । विश्व को जीवन की राह दिखाई है एवं अपने आप को आंतरिक रूप से, आत्मिक रूप से हमेशा मजबूत कर खडा किया है। विपत्ति के समय आत्मिक विवेक को जाग्रत कर अपने आप को हिमालयवत् विपदा के सम्मुख खड़ा किया है । एक बार पुनः इस तरह की महामारी से बचने में हमें हमारी भूमिका को सुनिश्चित करना पड़ेगा। यदि नहीं किया तो विश्व समुदाय कभी किसी को माफ नहीं कर पाएगा । हमें हमेशा की तरह जनकल्याण को, जीव कल्याण को, वैश्विक कल्याण को , ध्यान में रखते हुए घर में रहना है, अपने आप को बचाना है , अपने आसपास , अपने संपर्क में जो कोई भी आ रहा है उन्हें उचित के लिए प्रेरित करना है । उसके अनुचित व्यवहार को पाबंद करना है । यदि हमने ऐसा नहीं किया तो प्रशासन सख्त से सख्त रुख ले सकता है। यदि हम सही व्यवहार हेतु स्वयं प्रेरित रहेंगे तो हमें प्रशासन के द्वारा लिए गए सख्त से सख्त व्यवहार का सहयोग कर सकेंगे। हमें उसका विरोध नहीं करना पड़ेगा।

यदि परिस्थितियाँ हाथ से निकलती गई तो मुझे लगता है प्रशासन सख्त होगा , सख्त से सख्ततर होगा । प्रशासन पूर्ण सख्त हो गया तो जीवन क्या होगा ? उसकी कल्पना हम मध्यकालीन अस्तित्व को देखें तो समझ सकते हैं । हमें स्व नियंत्रण , आत्म प्रबंधन करतेहुए, कोरोना के इस दौर में जिम्मेदार नागरिक होने का बयान देना चाहिए।
जय हिंद जय भारत ।
अमित कुमार दवे,खड़गदा

नियम-संयम युक्त हों,
कोरोना से मुक्त हों।
कोरोना को हराएँगे,
उसको घर नहीं लाएंगे।।
कोरोना को हम सब मिलकर के विश्वपरिदृश्य से बाहर करेंगे। सही जीवनचर्या, सही दिनचर्या एवं पूर्ण संयम को विश्व पटल पर सभी को अपनाने हेतु प्रेरित करेंगे ।
धन्यवाद।
आत्म से करोगे याराना ,
स्वयं से हारेगा कोरोना।।

सादर सस्नेह
©डॉ. अमित कुमार दवे,खड़गदा
26/03/2020

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