वैशाखी आयी

वैशाखी आयी

शस्योत्सव हरित जड़ित नवान्न की झांकी आई
हुई प्रकृति नन्दित तरु, विटप पर स्वर्ण क्रान्ति आई

नव बालियों की मुक्ता से अलंकृत
नव-वधू प्रकृति पर अनुपम कान्ति आई

कृषक संग प्रकृति का हिय हरसा
क्षेत्रों में शस्यश्यामल स्वर्ण उपजा

कोयल की कूक, पिपहरी की पुकार
पी मिलन से पुलकित पाजेब की झनकार

झूम उठा शिरीष,पलाश,गुलमोहर,हरसिंगार
पाटल पुष्प, कर्णिका,बेला से प्रकृति का श्रृंगार

क्रीड़ा-कौशल, नृत्य-संगीत का संचार हुआ
लोकाचार,एकता-बंधुत्व का प्रचार हुआ

हुई हर्षित,पुलकित वधू पी की चितवन बांकी आयी
मृदंग-मजीरे संग मनभावन बिहू-वैशाखी आयी

सुनील पुष्करणा

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