Apr 22, 2021 · कविता
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वेदना

वेदना

देखिए कितनी भयानक आ गई है त्रासदी।
भूल कर न भूल सकता है जिसे हां ये सदी।

क्या लिखें कोई कथानक दृश्य है उन्माद का
काल का रथ आ रहा है फैसला अवसाद का।
कौन किसको अब बचाए ये जरा सा बोलिए
आत्मा के यवनिका पर आप खुद को खोजिए।

काल के स्वरूप में विकराल मुख खोले हुए
देखिए कि फूल कैसे किस कदर शोले हुए।
लोग जो भी दिल में बसते हैं हुई है फासले
देखिए आया कोरोना मौत का नव भाष ले।

है विकट अक्रांता व्याधियों से युग से भरा।
जाइए जिस ओर भी है दिख रहा मृत्यु खड़ा।
नव यवन दुष्चक्र है व्यूह कल युग का बना।
पीयूष से मुख थे भरे है विष जहां पर उत्फना ।

देखिए कितनी भयानक आ गई है त्रासदी।
भूल कर न भूल सकता है जिसे हां ये सदी।

©® दीपक झा रुद्रा

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दीपक झा रुद्रा
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