23.7k Members 50k Posts

वेदना

वेदना

जब अपने
अपने न रहे
तब होती है
वेदना

जब समुन्दर की
लहरों को
ठुकरा दे किनारा
तब होती है
वेदना

जब किसी
पंछी के
घरोंदे को
उजाड़ दे कोई
तब होती है
वेदना

जब बुढापे में
माँ बाप को
ठुकरा दे कोई
तब होती है
वेदना

जब हरे भरे
पेड़ो को
काट दे कोई
तब होती है
वेदना

पति पत्नी के
अहं से होने वाले
विछोह से
जब बच्चे होते है
तिरस्कृत
तब होती है
वेदना

जब नदी तालाबों
झील झरनों में
होता है
प्रदूषण
तब होती है
वेदना

वेदना
तेरी वेदना है
असहनीय
जो जितना
इसमें तपेगा
वो उतना
निखरेगा

लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

8 Views
Santosh Shrivastava
Santosh Shrivastava
भोपाल , मध्य प्रदेश
693 Posts · 3.7k Views
लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम...
You may also like: