गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

वृक्ष

वृक्ष
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पेड़ होते भूमि की नित——–शान हैं।
सृष्टि का भूलोक पर——-वरदान हैं।

सब निराले गुण समेटे हैं——-विटप,
फल हवा औषध दिए कुल –दान हैं।

दर्ज पन्नों में रहा इतिहास ——-अब,
बोधि तरु अरु कल्पतरु अभिज्ञान हैं।

है धरा पर रोपना बहुधा ———इन्हें,
फिर बचेगी मनुज तेरी ——-जान हैं।

फिर शुरू हो मैती’ चिपको —-से बड़े,
पूर्व में फूले फले ———-अभियान हैं।

बन्द होना चाहिए वन ———काटना,
रोपने तरु जो धरा ———-परिधान हैं।
****************************************** नीरज पुरोहित रुद्रप्रयाग(उत्तराखण्ड)

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