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वीर भगत सिंह

हो कर शहीद राजगुरू ,सुखदेव ,भगत सिंह,
दे गए हमे आजादी , वीर गति से ।

किसी की हिम्मत नहीं थी ,
जो चलते थे सीना तानकर ,
सर पर पगड़ी बांधे और मुछो को ऐठकर ।
थर थर काँपते थे दुश्मन ,
ऐसे थे ओ वीर भगतसिंह ।
दे गए हमे आजादी ,वीर गति से ।

असली हकदार जो थे आजादी के , वीर भगतसिंह ।
ओ शोला थे अंगार भभक कर जलते थे ।
ओ क्रांति सूर्य थे मनुष्यता के,
जो जाग्रत अवस्था में चलते थे ।
दे गए हमें आजादी, वीर गति से ।

उनके सीने में आग जलती थी ,
मानवता में मानवता के दुष्टता की ।
अंधश्रद्धा में डूबे हुए थे जन जन यहाँ के ,
तड़पता था मन भी उनका तेज गति से ।
दे गए हमें आजादी वीर गति से ।

राहुल गनवीर

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