कविता · Reading time: 1 minute

वीरों का देशप्रेम…

है नमन उनको सदा
जो हौसलों से भरे हैं
आंधी का रूप लेले कभी
दुश्मनों से टकराते हैं।

है नमन……..

देश की खातिर चले जाए
बंदूक तान कर चले जाए
पुलवामा के वीरो ने
हस्ते हस्ते शीश लुटाए।

है नमन…….

वेतन के लिए हर कोई काम करे
तो कोई अपने वतन के लिए
एक मात्रा का अंतर है यह
ज़रा इसको समझ कर देखिए।

है नमन……..

सीने को चौड़ा कर
चले जाते है छोड़ कर
आते है स्वर्गीय बनकर
अपनी आंखे, श्वास बंद करकर।

है नमन……..

नहीं मानते किस्मत को
सहते हर जख्म को
उन मात-पिता को नमन
जन्म दिया जिन्होंने इन वीरों को।

है नमन………

वंश अग्रवाल

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