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वीणा बोलती है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गीत

July 15, 2016

एक गीत
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गीत
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प्रीत ने छेेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है !
लग रहा संगीत मय संसार वीणा बोलती है !

मन सलोना जागते सपने लगा है पालने अब !
धड़कनों की ताल पर भीे ये लगा है नाचने अब !
भाव मन के कोरे कागज़ पर उतरने से लगे हैं
गीत, कविता, गीतिका में आप ढलने से लगे हैं
ढाल सुर में अब यही उदगार वीणा बोलती है !
प्रीत ने छेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है !

रात के आगोश में लिपटी लुभाती चाँदनी है !
कर रही मदहोश ऊपर से हवा मन भावनी है !
अश्रु भर आँखों में आते याद कर मनमीत को जब !
गुनगुनाती याद है बीते पलों के गीत को तब !
लग रहा सुन कर यही झंकार वीणा बोलती है !
प्रीत ने छेड़ें जो दिल के तार वीणा बोलती है !

— डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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