कविता · Reading time: 1 minute

विश्वास

मन के विश्वास को,
कम न होने दे यार ।
तेरी सकारात्मकता से,
दुश्मन जाएंगे हार ।।

इतना मत सोच,
मन को न कर अशांत ।
मन की जीत से ही,
सबकों देंगे मात ।।

तू हिम्मत परिवार की,
मत टूटने दे आस ।
तेरे विचारों से ही,
सबका बना है विश्वास ।।

हम मिलकर जीतेंगे,
इस महामारी की जंग ।
पास हमारे विश्वास है,
फिर से खिलेंगे नवरंग ।।

उठ बैठ मेरे यार,
अच्छी – अच्छी करें बात ।
निकल जाएंगे यह दिन,
फिर से होंगी मुलाकात ।।

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जे पी लववंशी, एमएससी (मैथ्स), एमए ( इतिहास, हिंदी, राजनीति विज्ञान) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और…
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