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** विश्वास मुझपे ना कर **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

March 12, 2017

इतना भी विश्वास मुझपे ना कर कि तूं धोखा खा जाये
इतना भी उधार मुझपे ना कर कि क़र्ज उतरा ना जाये
बहुत खूबियां है तुझमे और बहुत कमजोरियां है मुझमे
कौशिश करता हूं बहुत इस आदत को सुधारा ना जाये ।
?मधुप बैरागी

समझ नहीं आता जिंदगी
इतनी जिद क्यूँ करती है
जीने के तमाम रास्ते रोककर
जीने की कसम देती है ।।
?मधुप बैरागी
हम रोज नयी कविता गढ़ते हैं
क्या दिल को कभी पढ़ते हैं
गढ़ सकते अगर दिल को तो
रोज दिल तोड़ पुनः गढ़ते हम ।।
?मधुप बैरागी
दिल के जज़्बात अब किससे कहूं
ग़म-ए-हालात अब किससे कहूं
कोई तो समझे अब मुझको यारोँ
अब बिन मौसम बरसात किस्से कहूं।।
?मधुप बैरागी

19 7 16
जिंदगी चाहे तो अब मुझको ना आराम दे
जिंदगी जीने के वास्ते थोड़ा तो विश्राम दे
मत बन तूं क्रूर इतनी कंस के कारगाह सी
अब उठने से पहले थोड़ा तो चैन से सोने दे।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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